ब्रह्माकुमारी आश्रम का मामला, विधायक लोढ़ा ने पुलिस को कहा मत करो एक तरफा कार्यवाही

Brahmakumari Ashram case, MLA Lodha told police not to act one sided
Brahmakumari Ashram case, MLA Lodha told police not to act one sided

Sirohi News: ब्रह्माकुमारी आश्रम आबूरोड (Brahma Kumari Ashram Abu Road) के यौन शोषण प्रकरण को लेकर जेल में बंद देवेश के परिजनों ने विधायक संयम लोढा (Sanyam Lodha Sirohi MLA) को पुलिस द्वारा की गई एक तरफ ा कार्यवाही के संबंध में अवगत करवा कर उनके द्वारा दर्ज करवाये गये मुकदमें में ब्रहमाकुमारी के मुख्य अभियंता बीके भरत के खिलाफ कार्यवाही की मांग की।

गौरतलब है कि सदर थाना पुलिस ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के चीफ इंजीनियर पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार बीके कॉलोनी, तलेटी, आबूरोड निवासी देवेश को गुरुवार को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने संस्थान के चीफ इंजीनियर पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। इस मामले में संस्थान के चीफ इंजीनियर बीके भरत ने आरोपी पर उसका मसाज करते का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का मामला दर्ज करवाया था।

देवेश की माता विमला ने लोढ़ा को बताया कि उनकी पुत्र वधु के 1 सितम्बर को 1.30 बजे आॅपरेशन से डिलीवरी हुई थी और रक्त स्त्राव होने से उसकी पुत्र वधु की स्थिति गम्भीर बनी हुई थी। उसके बाद भी पुलिस 3 बजे दिवेश को उठाकर ले गयी एवं उसे छोड़ा नही। रात 8 बजे परिवार जनों को सूचित किया कि उसे गिरμतार कर लिया है। दिवेश द्वारा दर्ज करवाये गये मुकदमें में कोई कार्यवाही नही की गई और आरोपी ब्रह्माकुमारी आश्रम के चीफ इंजीनियर बीके भरत को आबूरोड से भगा दिया गया।

लोढ़ा ने आबूरोड सदर थाना अधिकारी आनंद कुमार से सर्किट हाउस सिरोही में बातचीत की और कहा कि मामले में एक तरफ ा कार्यवाही नही होनी चाहिए। लोढ़ा ने थाना अधिकारी से कहा कि आरोपी देवेश की गिरफतारी में उसकी पत्नी की आॅपरशन से डिलीवरी के मानवीय पक्ष को ध्यान में रखते हुए समुचित इंतजाम किये जाने चाहिए थे, जो नहीं किये गये।

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ब्रह्माकुमारी आश्रम के चीफ इंजीनियर बीके भरत व उसके अन्य साथी जो इस मामले में लिप्त हैं उनके खिलाफ कार्यवाही नही कर उन्हें भूमिगत कर दिया। लोढा ने कहा कि इस मामले में जो डेढ़ वर्ष से यौन शोषण से पीड़ित था उसके द्वारा दी गई रिपोर्ट व प्रस्तुत किये गये साक्ष्य की जांच करने के बजाय सीधे ही उसे गिरμतार करना उचित नही है।

लोढ़ा ने कहा कि पुलिस महानिदेशक ने कोरोना के चलते निर्देश जारी कर रखे हैं कि 7 वर्ष से कम सजा के अपराध के मामले में आरोपी को थाने में ही जमानत पर रिहा कर दिया जाए। उसे जेल नहीं भेजा जाए। दिवेश के मामले में पांच वर्ष से कम सजा की धाराएं होने के बाद भी उसे जेल भेज दिया गया। उसे गिरμतार कर किसी भी तरह की कोई बरामदगी भी नहीं की गई।

इस तरह की कार्यवाही के बाद लोगों में पुलिस की पक्षपात पूर्ण कार्यवाही का संदेश गया है। लोढ़ा ने थाना अधिकारी को मामले में निष्पक्ष कार्यवाही करने के निर्देश दिये।