मप्र-के-राज्यसभा-चुनाव-में-भाजपा-की-नजर-असंतुष्टों-पर

भोपाल, 26 फरवरी (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश की राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा की खास नजर कांग्रेस के असंतुष्टों पर रहने वाली है, क्योंकि भाजपा असंतुष्टों के सहारे बड़ा खेल करना चाहती है।

प्रदेश में राज्यसभा की जिन तीन सीटों के लिए अप्रैल माह में चुनाव होने वाले हैं, उनमें से एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस को मिलना तय है। वहीं, दूसरी सीट जीतने की कांग्रेस की ज्यादा संभावना है। राज्य के विधायकों की संख्या पर गौर किया जाए तो एक बात साफ होती है कि एक सदस्य को चुनाव जीतने के लिए 58 वोट की जरूरत होगी।

प्रदेश की 228 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 114, भाजपा के 107, चार निर्दलीय, एक सपा के और दो बसपा के विधायक हैं। इस तरह एक उम्मीदवार को 58 वोट मिलने पर कांग्रेस के पास 56 वोट रह जाएंगे, एक निर्दलीय विधायक सरकार में मंत्री हैं। इस तरह कांग्रेस के पास 57 विधायक हैं और उसे सिर्फ एक विधायक की जरूरत होगी, वहीं भाजपा के पाए एक उम्मीदवार को 58 वोट के बाद 49 वोट रह जाएंगे। भाजपा की कांग्रेस को शिकस्त देने के लिए असंतुष्ट विधायकों पर नजर टिकी हुई है।

राज्य में कांग्रेस की सरकार बने एक साल से ज्यादा का समय हो गया है, कई विधायक मंत्री बनने और निगम-मंडल में स्थान पाने के लिए अरसे से एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, मगर नियुक्तियां न होने से असंतोष है और भाजपा इसी असंतोष का लाभ लेना चाहती है।

तीन निर्दलीय और सपा-बसपा के विधायकों पर भी भाजपा की नजर है, भाजपा अगर गैरकांग्रेसी विधायकों को अपने पाले में करने और कांग्रेस में सेंधमारी में सफल होती है तो स्थितियां बदल सकती हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री डॉ. गोविंद सिंह का कहना है कि कांग्रेस को दो और भाजपा को एक सीट मिलनी तय है, वहीं भाजपा को दो सीटें मिलने जैसी लफ्फाजी वे नहीं करते। वहीं, भाजपा के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष वी.डी. शर्मा का कहना है कि वे कांग्रेस को वाकओवर नहीं देंगे।

–आईएएनएस