नई दिल्ली। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिक सीमा पर तैनात भारतीय जवानों पर हथियारों का इस्तेमाल कर उन पर दबाव बनाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते। हाल के दिनों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कोई ज्यादा हाथापाई या धक्का-मुक्की नहीं हुई है, मगर चीन के विस्तारवादी मंसूबे अभी भी कायम हैं।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तैनात अपने विरोधियों को डराने और एक-दूसरे को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हवा में फायरिंग अब पूर्वी लद्दाख में नई सामान्य (न्यू नॉर्मल) धारणा बन गई है।

15 जून को गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद चीन ने अपनी नापाक हरकतों में कुछ बदलाव किया है।

शीर्ष सरकारी सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच व्याप्त तनाव के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर हवाई फायरिंग की तीन घटनाएं हुई हैं।

पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर सितंबर की शुरुआत में, जब भारतीय सेना फिंगर-3 के पश्चिमी हिस्से की ओर बढ़ीं, तो चीनी सेना ने फिंगर-3 और फिंगर-4 के बीच के क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए भड़काऊ सैन्य कदम उठाए। इस दौरान जब दोनों देशों के सैनिक कुछ मीटर की दूरी पर आ गए थे, तब लगभग 200 राउंड फायरिंग हुई।

सूत्र ने यह भी कहा कि सात सितंबर को चुशुल के करीब पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चेतावनी के तौर पर हवाई फायर किए गए थे।

इसके बाद भारतीय सेना ने एक बयान में कहा कि चीन सीमा पर स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए उकसावे वाली गतिविधियां जारी रखे हुए हैं और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों ने हमारे सैनिकों को डराने के प्रयास में हवा में कुछ राउंड फायरिंग की।

भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा था कि किसी भी स्तर पर भारतीय सेना ने एलएसी पार नहीं की है और ना ही उसने गोलीबारी समेत किसी आक्रामक तरीके का इस्तेमाल किया है। सेना ने कहा है कि यह चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ही है जो सैन्य, राजनयिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा जारी होने के बाद भी औपचारिक रूप से समझौतों का उल्लंघन कर रही है और आक्रामक गतिविधियां कर रही है।

कर्नल अमन ने कहा, सात सितंबर, 2020 के तत्काल मामले में पीएलए के सैनिकों ने ही एलएसी पर हमारे सैनिकों के पास आने की कोशिश की और जब उन्हें रोका गया तो पीएलए के सैनिकों ने हवा में कुछ राउंड फायर कर अपने सैनिकों को डराने की कोशिश की। हालांकि, गंभीर उकसावे के बावजूद भारतीय सैनिकों ने संयम से काम लेते हुए परिपक्व और जिम्मेदार तरीके से व्यवहार किया।

चीन ने भी भारतीय सेना पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग करने का आरोप लगाया था।

सूत्रों ने यह भी कहा कि इन दो घटनाओं से पहले भी चेतावनी के तौर पर फायरिंग की गई थी। यह पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर हुई थी।

हालांकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी की ओर से मॉस्को में एक समझौते पर बातचीत करने के बाद से सीमा पर स्थिति कुछ शांत जरूर हुई है।

–आईएएनएस

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