जैसलमेर । भाटिया ऋषि परंपरा के कथाकार हैं और वे इस परंपरा का  पूरी गम्भीरता से पोषण कर रहे हैं । उक्त उद्गार  साहित्य अकादमी नई दिल्ली में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक और कवि कथाकार पत्रकार मधु आचार्य आशावादी  ने डॉ ओम प्रकाश भाटिया की पुस्तकों के लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए ।

भारतीय साहित्य विकास न्यास,जोधपुर और थार साहित्य संस्थान जैसलमेर की ओर से  भाटिया बगेची सभागार में गुरुवार को आयोजित समारोह में आचार्य ने  डॉक्टर ओम प्रकाश भाटिया की कहानियों को आधुनिक राजस्थानी  कथा साहित्य में बदलाव की कहानियां बताया ।

उन्होंने कहा कि आज जहां इस मरुभूमि में नकारात्मक परिवर्तन हो रहे हैं, भाटिया की कहानियां उन गांवों की व्यथा और पीड़ा को संवेदना के साथ अभिव्यक्त करती है ।

भाटिया ऋषि परंपरा के कथाकार - मधु आचार्य 1

उनकी भाषा में जहां एक ओर करुणा है, वहीं  दूसरी ओर वैश्वीकरण की पीड़ा का प्रत्याख्यान भी है । इस अवसर पर डॉ भाटिया के राजस्थानी कहानी संग्रह उफनतो आभो तथा हिन्दी बाल कथा संग्रह आंखों में आकाश का अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया । 

समारोह के अध्यक्ष प्रतिष्ठित कवि आलोचक डॉ आईदान सिंह भाटी ने कहा कि डॉक्टर ओम प्रकाश भाटिया की कहानियां थार की आत्मा की अभिव्यक्ति है । उन्होंने अपनी कहानियों में गांवों के परिवर्तनों के माध्यम से यह बताने की कोशिश की है कि आज विकास के नाम पर सभी कुछ सकारात्मक नहीं है ।

उन्होंने कहा कि  भाटिया की बाल कहानियों में स्थानीयता की अनुगूंज है और बच्चों के भविष्य के प्रति मनोभाव है  । व्यंग्यकार और कथाकार बुलाकी शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए उनकी कथाओं की भाषा, शिल्प और कथ्य की    विवेचना करते हुए कहा कि डॉक्टर भाटिया अपनी परंपरा की जमीन पर खड़े होकर भी प्रगतिशील जीवन मूल्यों के  बिंब रचते हैं ।

इन बिंबो में हम राजस्थानी समाज की आहट देख सकते हैं । इन कथाओं से आहट सुनाई देती है, वैसी आहट समकालीन राजस्थानी कहानियों में बहुत कम सुनाई देती है।

भाटिया की ये कथाएं राजस्थानी कथा भूमि को न केवल मजबूत करती है वरन उसे वैश्विक स्तर और परिदृश्य पर ले जाती है । 

भाटिया ऋषि परंपरा के कथाकार - मधु आचार्य 2

समारोह के मुख्य वक्ता  गीतकार सत्यदेव संवितेंद्र ने  कहा कि मैं डॉक्टर ओम प्रकाश भाटिया के लेखन का निरंतर पाठक रहा हूं और मैंने पाया है कि भाटिया न केवल इस धरती की आत्मा को जानते हैं वरन विज्ञान और तकनीक के द्वारा जो कुछ आज हमें पकड़ाया जा रहा है उसका भी विरोध करते हैं । यह विरोध सृजनात्मक होकर कथा रंगों में बदल जाता है । भाटिया कहानियों को कविताई तक ले जाते हैं और यहां कविताई का अर्थ केवल और केवल मानवीय संवेदना है । 

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि  कवि- कथाकार  राजेंद्र जोशी ने कहा कि मैं एक पाठक और लेखक  के नाते उन्हें निरंतर पढ़ता रहा हूं और यह जानने की मन में सदैव प्रत्याशा रही है कि  राजस्थानी कहानी को जो लोग आगे ले जा रहे हैं क्या वे बदलते जीवन मूल्य का अंकन कर रहे हैं और डॉक्टर भाटिया की कहानियां पढ़ने के बाद मुझे सकारात्मक स्वर सुनाई पड़े ।

जोशी ने कहा कि  इन स्वरों में आधुनिकता बोध और जीवन की गर्माहट के चित्र मुझे मिले । मैं राजस्थानी कथा लेखन में उन्हें आधुनिक जीवन में शीर्ष पर पाता हूं । 

कथाकार ओम प्रकाश भाटिया ने अपनी सृजन यात्रा को साझा करते हुए कहा कि जिस समाज में मैं रहा हूं उसके आसपास जो जीवन है उस जीवन को मैं सदैव खंगालता रहा हूं और मुझे मानवीय संवेदन के जो मोती मिले, मैंने उन मोतियों को अपनी स्थानीय भाषा में अभिव्यक्त किया है । यह अभिव्यंजना मानवीय मूल्यों  और रचनात्मकता के साथ अभिव्यक्त करने की मेरी एक कोशिश रही है । 

वयोवृद्ध साहित्यकार डाक्टर दीनदयाल ओझा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें ऐसे रचनाकारों को पढ़ते रहना चाहिए जो हमें जीवन मूल्य और संबल देते हैं । 

उन्होंने कहा कि डॉक्टर भाटिया जैसलमेर के कथा साहित्य के प्रेरणा पुंज हैं । समारोह का संयोजन करते हुए कवि रंगकर्मी आनंद जगानी ने समारोह का संचालन करते हुए डॉक्टर ओम भाटिया की चार दशक की सृजन यात्रा की उपलब्धियां बताते कहा कि भाटिया की सृजनात्मक यात्रा युवाओं के लिए प्रेरक रही है । 

इस अवसर पर राम लखारा, गिरधर भाटिया, लक्ष्मीनारायण खत्री, हरीवल्लभ बोहरा हरि, जितेंद्र पुरोहित, छत्तीसगढ़ के साहित्यकार  महेश श्रीनिवास आदि ने भी विचार व्यक्त किए । जैसलमेर के अनेक युवा और वयोवृद्ध पाठक इस अवसर पर उपस्थित थे ।