कोरोना-वायरस-के-बहाने-चीन-पर-निशाना-लगाना-गलत

बीजिंग, 13 फरवरी (आईएएनएस)। कोरोना वायरस के आने की दहशत इतनी भीषण है कि लोग कई बार अपने परिचितों से भी बचने की बात करने लगे हैं। मुझे इस बीच चीन-भारत से कई मित्रों से लगातार बातचीत होती रही जो इस वायरस की चिंता से परेशान हैं। भारत और चीन के बीच आवागमन भी इस बीच हुआ है। ऐसे में उन परिवारों में बड़ी आशंकाएं हैं जिनके लोग चीन से भारत आए और जो कभी भारत से चीन गए हैं।

लेकिन, आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि इस बीच भारत से चीन सेवा अथवा कार्य लिए लोग वापस चीन पहुंच भी रहे हैं। कारण स्पष्ट है कि जीवन चलाना है, लेकिन वायरस से निपटना भी जरूरी है।

चीन से भारत पहुंचे विद्यार्थियों के दल के एक सदस्य ने मुझे बताया कि भारत में अब वापस आने के बाद वे निर्धारित हिदायतें मान रहे हैं और अपने और अपने परिवार ही नहीं पूरे समाज और देश के लिए चिंतित हैं कि वायरस का प्रभाव किसी पर न पहुंचे।

सौभाग्य की बात यह है कि इस बीच चीन से भारत पहुंचे लोग स्वस्थ हैं और वह अपने दैनिक कार्यों और जिम्मेदारियों से अलग रहकर एकांतवास कर रहे हैं। ताकि उनकी कठिनाई की स्थिति में न केवल कोई और प्रभावित हो बल्कि वह स्वयं भी निर्धारित कर पाएं कि वह स्वस्थ हैं।

इधर, चीन के समाचार पत्रों और मीडिया से भी लगातार यह कोशिश की जा रही है कि चीन द्वारा किए जा रहे कार्यों और बचाव के उपायों को लोगों तक पहुंचाएं, जिससे कि इस महामारी से आसन्न संकट से निपटने की तैयारियों को भारत और दुनिया के तमाम देशों तक पहुंचाया जा सके।

यह निश्चय ही भीषण संकट है, जब हम इस मुश्किल में घिरे हुए पड़ोसी या अपने परिवार के लिए चिंतित होते हैं। लेकिन, चिंतित होने से ज्यादा जरूरी है कि हम यह दिमाग में ना लाएं कि बीमारी चीन-भारत आवागमन से जुड़े तमाम लोगों को ग्रस्त कर रही है। यद्यपि पशुओं से जनित बीमारियां मनुष्यों में पहुंचने की यह पहली घटना नहीं है, फिर भी कई बार लोग चीनी समाज के बारे में इस तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। इससे लगता है कि उन्हें अपने समाज और अपने आसपास हो रही तमाम तरह की बीमारियों की चिंता तो खत्म हो गई है, अब वह कोरोना के बहाने चीन को निशाना बना रहे हैं।

मुझे चीन में ढाई वर्ष रहने के अनुभव के दौरान पता है कि चीन किस तरह आपदाओं से निपटने की क्षमता रखता है और आज भी पूरा चीन इस कार्य में लगा हुआ है। भारत में भी अगर किसी व्यक्ति या परिवार में इस तरह की बीमारी की संभावना पता चले तो निश्चय ही हमें उसके प्रति सचेत रहने की आवश्यकता तो है ही अपने परिवार और समाज को इस तरह की आसन्न स्थिति में बचाए रखने के लिए तत्परता की भी आवश्यकता होगी।

मैं इस समय चीन के नागरिकों के संकट में भारत सरकार द्वारा किए गए अनुरोध को सकारात्मकता के रूप में लेता हूं और मुझे अंदाज है कि भौगोलिक सीमाओं को बीमारियां नहीं देखतीं। अच्छा हो कि हम पड़ोस की बीमारी को एक ऐसे संकट के रूप में देखें जो अगर और विकराल रूप ले, तो भारत बहुत दूर नहीं है।

इस बीच, मेरी चीन में भारतीय और चीनी परिवारों तथा वहां भारतीय प्रशासन से जुड़े लोगों से जो बातचीत हुई है, उससे भी यह समझ में आ रहा है कि चीन इस समस्या से निबटने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है और आम नागरिकों ने उसके लिए पूरा सहयोग करना शुरू किया है।

यद्यपि अनेक तरह के विवादित बयान और चर्चा भी इस बीच आ रही हैं। लेकिन कोरोना वायरस से निपटने के लिए भारत में जो प्रतिबद्धता सरकार द्वारा दिखाई जा रही है, वह तभी सफल हो सकती है जब आम जनता भी उसको उसी रूप में देखे।

(लेखक नवीन चंद्र लोहनी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हैं। वह जुलाई 2019 में चीन से भारत लौटे हैं। उन्होंने ढाई वर्ष तक भारत सरकार की ओर से शंघाई अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में हिंदी और संस्कृत अध्यापन किया। वह भारत-चीन मित्रता के लिए हिंदी इन चाइना समूह के संस्थापक सदस्य हैं।)

(साभार–चाइना रेडियो इंटरनेशनल,पेइचिंग)

–आईएएनएस