गुरु ने धनु राशि में किया प्रवेश, इन राशि के लोगों के लिए अच्‍छा समय

30 जून, 2020 की सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर गुरु ने धनु राशि में (Jupiter in Sagittarius) प्रवेश किया है। यहां पर गुरु ग्रह 20 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 23 मिनट तक गोचर करेंगे। इसके बाद वे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

इस राशि में आकर देव गुरु वृहस्पति का केतु से संयोग हुआ है। यहां गुरु पर राहु की भी दृष्टि होने से गुरु चांडाल योग बना। इसके अलावा गुरु का सूर्य और बुध से समसप्तक योग बना है। इसी के साथ शनि और गुरु की युति भी समाप्त हो गई है लेकिन गुरु के राशि परिवर्तन से केतु और गुरु की युति पुनः प्रारंभ हो गई है। अब पुनः गुरु मकर राशि में 20 नवंबर को प्रवेश करेंगे और वर्ष पर्यंत उसी राशि में विचरण करेंगे।

धनु और मीन राशि के स्वामी बृहस्पति कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीच राशिगत माने गए हैं।

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि वक्री बृहस्पति का जब भी राहु के साथ दृष्टि संबंध स्थापित होता है तो कई तरह की समस्याएं आती हैं। राहु एक पाप ग्रह है। इस समय राहु शक्तिशाली अवस्था मे हैं. इसलिए राहु अपना प्रभाव डालने की कोशिश करेगा लेकिन बृहस्पति इसके प्रभाव को कम करने में मदद करेंगे लेकिन फिर भी बाढ़, प्राकृतिक आपदा, भौगोलिक बदलाव और शासन प्रशासन स्तर पर बड़े फैसले लेने की स्थिति बन सकती है।

ज्‍योतिषी पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार गुरु को एक शुभ ग्रह माना जाता रहा है। गुरु ने जिस धनु राशि में प्रवेश किया है, वे उसी राशि के स्‍वामी भी हैं। इसके अलावा गुरु मीन राशि के भी स्‍वामी हैं। यह ग्रह कर्क राशि के उच्‍च एवं मकर राशि के नीच भाव में रहता है। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में उच्‍च का गुरु होता है, वे जीवन में प्रगति तो पाते हैं लेकिन उनका शरीर मोटा होता जाता है। शुगर के रोग का भी संबंध गुरु के कुंडली में होने से है। गुरु की पूजा करने से पेट के रोग दूर होते हैं। कुछ राशि के लोगों के लिए 20 नवंबर 2020 तक का समय बहुत अच्‍छा रहने वाला है।

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह का प्रमुख स्थान है। बृहस्पति देवताओं के गुरु माने जाते हैं, इसी कारण इन्हें गुरु कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को धनु और मीन राशियों का स्वामी भी माना जाता है. बृहस्पति ज्ञान और बुद्धि के दाता माने गए हैं. साथ ही साथ ये संतान, धार्मिक कार्य, सौभाग्य और पुण्य के भी कारक हैं।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की जिस जातक पर बृहस्पति की कृपा होती है, उसका कारोबार खूब फलता-फूलता है। उसे अपने उच्च अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलता है। बृहस्पति देव हमेशा शुभ फल देते हैं। ये किसी भी जातक के जीवन में आ रही नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदल देते हैं। जैसे उसे यदि जीवन में सफलता न मिल रही हो, कारोबार में घाटा या वृद्धि न हो रही हो, विवाह में अड़चनें आ रही हो आदि तो गुरु की दिव्य दृष्टि पड़ते ही जातक का सौभाग्य जाग जाता है। उसके सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं।

जानिये गुरु के राशि परिवर्तन का आपकी राशि के लोगों पर क्‍या प्रभाव पड़ेगा

मेष राशि

इस राशि के लोगों के नवें स्‍थान में गुरु का गोचर होगा। इसका मतलब है भाग्‍य अच्‍छा रहेगा। काम सफल होंगे। स्‍वास्‍थ्‍य भी ठीक ही रहेगा। लोकप्रियता में भी वृद्धि होगी।

वृषभ राशि

गुरु इस राशि के आठवें स्थान में गोचर करेंगे। इसके प्रभाव के चलते जातक को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के साथ ही संसार के व्‍यवहारिक लाभों की भी प्राप्ति होगी। हां, आपको दान का पुण्‍य लाभ अवश्‍य लेना चाहिये।

मिथुन राशि

इस राशि के लोगों के लिए यात्रा का योग है। यात्रा शुभ रहेगी। गुरु इनके सातवें स्‍थान में गोचर करेंगे। जमीन जायदाद के मामलों में आपको सुखद परिणाम हासिल होंगे। 20 नवंबर तक अपने व परिजनों के स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखना होगा। इस दशा से बचने के लिए आपको सोना तोलने के काम आने वाली रत्तियां, लाल गूंजे के बीज पीले वस्‍त्र में बांधकर अपने साथ रखना होंगे।

कर्क राशि

इस राशि के लोगों छठे स्‍थान पर गुरु गोचर करेंगे। इसका अर्थ यह हुआ कि समय ठीक नहीं चल रहा है। दोस्‍तों से कहासुनी हो सकती है। आर्थिक समस्‍या आ सकती है। परिजनों का भी कम सहयोग मिलेगा। अशुभ प्रभावों से बचने के लिए आप कम आयु की कन्‍याओं को पीले रंग का वस्‍त्र भेंट करें। पीपल की जड़ों में पानी दें। शुभ परिणाम प्राप्‍त होंगे।

सिंह राशि

इस राशि के लोगों को कुछ परेशानी आ सकती है। गुरु इनके पांचवें स्‍थान में गोचर करेंगे। इसका अर्थ यह है कि घर-परिवार में काम कम बनेंगे। 20 नवंबर तक आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहेगी। हालांकि पति या पत्‍नी से आपके संबंध इस समय बेहतर बने रहेंगे। 5 महीनों तक अशुभ फल से बचने के लिए आप भगवान श्रीगणेश की आराधना करें। धार्मिक कार्य में ध्‍यान दें, बस इस काम के लिए किसी से धन एकत्र ना करें।

कन्या राशि

कन्‍या राशि के लोगों के लिए यह शुभ समय है। गुरु इनके चौथे स्‍थान पर गोचर करेंगे, जिसके परिणाम स्‍वरूप इन्‍हें भूमि, भवन, वाहन, संपत्ति आदि की लाभ प्राप्ति होगी। इस समय आपको औरों की मदद करते रहना चाहिये। आप धर्म के कार्यों में भी शामिल होंगे। सेहत ठीक बनी रहेगी। आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी। जीवन में बहुत सुख एवं सुविधाएं मिलेंगी। 20 नंवबर तक समय बहुत अच्‍छा है।

तुला राशि

तुला राशि के लोंगों को धन प्राप्ति का योग है। गुरु इनके तीसरे स्‍थान में गोचर करेंगे। इसके चलते आपको पैसा तो मिलेगा लेकिन वह पैसा कई कामों में खर्च हो जाएगा। हो सकता है आपका सामाजिक व्‍यवहार ठीक ना चले। यदि अशुभ फल से बचना चाहते हैं तो दुर्गा माता की पूजा व आराधना करें। कन्‍या पूजन भी करें।

वृश्चिक राशि

इस राशि के लोगों के लिए आर्थिक हालात मजबूत होंगे। गुरु आपके दूसरे स्‍थान में गोचर करेंगे। इस प्रभाव से आपको धन की प्राप्ति होगी। आपके भीतर दान एवं धर्म की भी प्रवृत्ति बढ़ेगी। 20 नंवबर तक समय अच्‍छा है। आप सवा किलो चने की दाल को पीले कपड़े में बांधें और मंदिर में दान आदि करें।

धनु राशि

धनु राशि के लिए गुरु पहले स्‍थान में गोचर होंगे। इसके प्रभाव के चलते आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी। आपके स्‍वभाव के चलते आपको प्रगति मिलेगी। यदि आपके घर में कोई केस चल रहा है तो आपको किसी वरिष्‍ठ से राय मशविरा करना चाहिये। आपका स्‍वास्‍थ्‍य उत्‍तम रहेगा। दुश्‍मन परास्‍त होंगे। 20 नंवबर तक उच्‍च शिक्षा के भी योग हैं। इस दौरान शुभ फल प्राप्ति के लिए आप अपनी आय का कुछ अंश, घर की तिजोरी में संभालकर रख लें। इसे 5 महीनों तक खर्च ना करें। इसके बाद आप इसका उपयोग कर सकते हैं।

मकर राशि

मकर राशि के बारहवें स्‍थान में गोचर करेंगे। इसके चलते आपके परिवार में किसी वरिष्‍ठ सदस्‍य को समस्‍या आ सकती है। पैसे का प्रवाह भी पूरी तरह से ठीक नहीं रहेगा। 20 नवंबर तक आप अपने खर्चे कम करें तो ठीक रहेगा। शुभ फल प्राप्ति हेतु एवं अशुभ फल से बचने हेतु आप केसर का तिलक धारण करें। हल्‍दी का भी तिलक लगा सकते हैं।

कुंभ राशि

इस राशि के लोगों के 11वें स्‍थान में गुरु गोचर होंगे। इसके चलते आपके पारिवारिक रिश्‍ते सुधरेंगे। आप धार्मिक कार्य अधिक करेंगे। आय भी बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। हां, इस दौरान यदि घर या बाहर किसी को भी आपकी मदद की जरूरत हो तो उसकी मदद जरूर करें।

मीन राशि

मीन राशि के लोगों को करियर, नौकरी में सफलता की प्राप्ति होगी। परिवार में शांति रहेगी। गुरु आपके दसवें स्‍थान पर गोचर करेंगे, जिसका परिणाम यह होगा कि आपको लाभ मिलेगा। सोना, चांदी सहित कपड़ा व्‍यापारियेां के लिए यह समय बहुत अच्‍छा है। यदि आप सिर पर पगड़ी धारण करते हैं तो पीले केसर का बभी एक तिलक जरूर लगाएं।

समझें देव गुरु वृहस्पति के महत्व को

वैदिक ज्योतिष में गुरु को अत्यंत शुभ ग्रह माना जाता है। साथ ही बृहस्पति को नवग्रहों में देव गुरु का दर्जा भी दिया गया है। इन्हें अध्यात्म का कारक माना जाता है और इन्हें दार्शनिक का दर्जा भी दिया गया है। यह ज्ञान के भी दाता हैं। ऐसा माना जाता है कि देव गुरु बृहस्पति हमारे आध्यात्मिक ज्ञान व बुद्धि को निर्देशित करते हैं और जिस जातक पर यह प्रसन्न होते हैं, उसे जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं रहती। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की गुरु से प्रभावित जातक को समाज में बहुत यश व सम्मान मिलता है। जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति का प्रभाव अधिक होता है, उस व्यक्ति का मन धर्म एवं आध्यात्मिक कार्यों में अधिक लगता है।

हमारे इस ब्रह्मांड में सूर्य के बाद बृहस्पति दूसरे सबसे विशाल ग्रह हैं। बृहस्पति एकमात्र ऐसे ग्रह है जो वक्री अवस्था यानी अपनी उल्टी चाल में भी बहुत सारी राशियों के जातकों को लाभ दे जाते हैं। कर्क राशि में उच्च एवं मकर राशि में नीच के होते हैं। धनु व मीन इनकी अपनी राशियां हैं।

वैदिक ज्योतिष में गुरु गोचर को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि गुरु जीवन में उन्नति के साथ-साथ ज्ञान, कर्म, धन, पुत्र और विवाह के कारक होते हैं।

इन मंत्रों के जाप से होगा लाभ

गुरु कृपा दिलाने वाला प्रार्थना मंत्र- देवमंत्री विशालाक्षः सदा लोकहितेरतः। अनेकशिष्यैः संपूर्णः पीडां दहतु में गुरुः।।

देवगुरु बृहस्पति की प्रसन्नता के लिए पीपल की समिधा से हवन तथा गुरु तंत्रोक्त मंत्र का जाप करना चाहिए।

तंत्रोक्त मंत्र – ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः। जप संख्या – 19,000 (उन्नीस हजार)

मोबाइल पे ताजा समाचार पढ़ें फेसबुक पेज लाइक करें: ट्वीटर पे फॉलो करें: