BSF ने बॉर्डर पर पकड़ा टैग लगा पाकिस्तानी पक्षी हाउबारा बस्टर्ड

bsf caught houbara bustard bird on jaisalmer border

Nachna / Jaisalmer News : नाचना पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित बाहला गाँव के पास सीमा सुरक्षा बल (BSF) की चौकी पर जवानों ने तारबंदी में उलझे एक पक्षी को निकाला है जिसके पैरों पर टैग लगा हुवा है. जानकारी के अनुसार पकड़ा गया पक्षी सोन चिरैया-हाउबारा बस्टर्ड (houbara bustard) है जो कि पाकिस्तान में सरंक्षित प्रजाति का पक्षी है.

बीएसएफ के सूत्रों ने बताया कि गश्त कर रहे बल के जवानों ने तारबंदी में पक्षी को फडफडाते देखा तो उसे बचाने के लिए बाहर निकाला, जवानों ने देखा कि उसके पैर में टैग लगा हुवा है जिस पर a51 लिखा है. जिसके बाद उन्होंने पक्षी को कब्जे में लेकर उच्चाधिकारियों को सूचित किया. बीएसएफ ने पक्षी को पुलिस थाना नाचना में सुपुर्द किया है.

जानिये सोन चिरैया-हाउबारा बस्टर्ड (houbara bustard) के बारें में

आपको जानकारी दे दें कि सोन चिरैया कभी मोर के साथ राष्ट्रीय पक्षी बनने की की होड़ में थी लेकिन अब खात्मे की कगार पर है, भारतीय वन्यजीव संस्थान यानि डब्ल्यूआईआई के ताजा रीसर्च में जानकारी मिली है कि भारत में महज 150 सोन चिरैया बाकी रह गईं हैं. कई लोग इसे सोहन चिड़िया, हुकना, गुरायिन भी कहते हैं. राजस्थान में इसे गोडावण और राज्य पक्षी भी कहते हैं.

एशियन हाउबारा बस्टर्ड ( क्लैमाइडोटिस मैककेनी  ) एवियन परिवार ओटिडिडा का एक सदस्य है जिसे आमतौर पर बस्टर्ड्स के रूप में जाना जाता है।

एशियाई हाउबारा बस्टर्ड मिस्र के नील नदी के पूर्व से लेकर मंगोलिया और चीन,अफगानिस्तान, बहरीन, चीन, मिस्र, भारत, ईरान, इराक, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कुवैत, किर्गिस्तान, मंगोलिया, ओमान, पाकिस्तान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, यूएई, उज्बेकिस्तान और यमन, नेपाल और यूरोप के कुछ हिस्सों में पायी जाती है.

हाउबारा बस्टर्ड एक अवसरवादी सर्वभक्षी है जिसमें छोटे पौधे, पत्ते और कीड़े से लेकर छोटे सांप, कृंतक या यहां तक ​​कि छोटे पक्षी होते हैं। ये रेगिस्तानी-अनुकूलित बस्टर्ड पानी नहीं पीते हैं बल्कि इसे भोजन के माध्यम से सेवन करते हैं.

ये पक्षी प्रवासी है सर्दी के दिनों में मध्य पूर्वी कजाकिस्तान से अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और कुछ थार रेगिस्तान और दक्षिण-ईरान में भी पहुंचते हैं.

पाकिस्तान सरकार अरब के शेखों से पैसे लेकर इसके शिकार की अनुमति भी देती है,अमीर शेखों का मानना है कि सोन चिरैया का मीट खाने से सेक्स पावर बढ़ती है. जबकि कोई रिसर्च इस बात की तस्दीक नहीं करती.दूसरा शौक का मामला है क्योंकि चिरैया के शिकार में बाज़ का इस्तेमाल होता है और ये खेल देखने में शेखों को बड़ा मजा आता है.

सोन चिरैया नवंबर से जनवरी माह के दौरान मध्य एशियाई क्षेत्र से पाकिस्तान में आती हैं। उन्हें यहां मध्य एशियाई क्षेत्र की तुलना में थोड़ा गर्म मौसम मिलता है जो उन्हें काफी मुफीद लगता है। सोन चिरैया की घटती आबादी के चलते कई अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संधियों के तहत इसका शिकार प्रतिबंधित है। यही नहीं स्थानीय वन्य संरक्षण कानून में भी इस पर बैन है।

पाकिस्तान के आम लोगों को इसके शिकार की अनुमति नहीं है। पाकिस्तान इसके शिकार की इजाजत एक सॉफ्ट डिप्लोमेसी के तौर पर करता है। तेल से समृद्ध खाड़ी देशों के अमीर शेख सोन चिरैया का शिकार करने के लिए प्रति व्यक्ति पाकिस्तान को 1 लाख अमेरिकी डॉलर ( यानी करीब डेढ़ करोड़ पाकिस्तानी रुपये) देते हैं।

सोन चिरैया के शिकार में बाज़ के इस्तेमाल के लिए 1000 डॉलर अलग से वसूलता है पाकिस्तान

अमीर शेख बाजों की मदद से सोन चिरैया का शिकार करते हैं. पाकिस्तान एक बाज के लिए शेखों से 1000 अमेरिकी डॉलर (यानी 1.54 लाख पाकिस्तानी रुपये) वसूलता है. प्रशासन का कहना है कि इन पैसों का इस्तेमाल इन पक्षियों की तादाद बढ़ाने में और उस इलाके के विकास के कामों में किया जाता है. 2014 में पाकिस्तान में एक रिपोर्ट लीक हुई थी जिसमें बताया गया था कि साऊदी प्रिंस ने 21 दिनों के शिकार के दौरान ऐसे 2000 पक्षियों का शिकार किया था.

 

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