क्या बड़ी संख्या में पहुँची अजमेर पुलिस ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर?

सोशल मीडिया पर राजस्थान के अजमेर का एक विडियो वायरल है. विडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि लॉकडाउन खुलते ही अजमेर पुलिस नियम कानून को ताक पर रख सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सैकड़ों की संख्या में एक साथ जियारत करने पहुँच गए. फेसबुक पर 7 जुलाई को अपलोड किए गए इस वायरल विडियो की न्यूज़18 इंडिया की टीम ने पड़ताल की.
वायरल विडियो एक जगह होटल कमाल पैलेस लिखा हुआ नजर आया तो सबसे पहले चैनल की टीम ने पता किया कि क्या वो होटेल अजमेर में ही है. पड़ताल करने पर गूगल मैप के जरिए पता चला कि होटल अजमेर में दरगाह के सामने वाली सड़क पर है। एक तस्वीर में होटेल का फोन नंबर भी लिखा हुआ था. एस टी डी कोड के बारे में पता लगाने के बाद वो भी अजमेर शहर का ही निकला। इससे साबित हो गया की वायरल विडियो अजमेर का ही था.
इसके बाद न्यूज18 इंडिया ने अजमेर पुलिस के दरगाह थाने के एसएचओ हेमराज मूंड से संपर्क किया। उन्‍होंने मामला पूरी तरह से साफ किया। दरअसल, राजस्थान सरकार ने 21-30 जून तक जागरूकता अभियान चलाया था जिसका मकसद रैलियाँ निकाल के लोगों को कोरोना का प्रति जागरूक करना था. इसके तहत जिला प्रशासन ने रैली निकाली थी. 20 मार्च से दरगाह बंद है – कोई भी धार्मिक स्थल नहीं खुला है – केवल खादिम जा रहे हैं। हेमराज मूंड के अनुसाआर, “अजमेर पुलिस के सोशल मीडिया अकाउंट को पर हमें 30 जून को अपलोड एक विडियो मिला। इसमें अजमेर पुलिस के जवानों को जागरूकता रैली निकालते हुए देखा जा सकता है।“
मतलब साफ है कि अजमेर का प्रसिद्ध दरगाह लॉकडाउन हटने के बाद भी बंद है. ऐसे में हाजिरी लगाने की बात पूरी तरह झूठ है और जो विडियो वायरल हो रहा है उसमें पुलिस वाले हाजिरी लगाने नहीं जा रहे बल्कि कोरोनावायरस के लिए जाकरूकता फैला रहे हैं। न्यूज़18 इंडिया की पड़ताल में वायरल हो रही खबर गलत सााबित हुई।

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