जैसलमेर - जल्द ही खत्म हो जाएगा राजस्थान के सरताज गोडावण का अस्तित्व 1
जैसलमेर - जल्द ही खत्म हो जाएगा राजस्थान के सरताज गोडावण का अस्तित्व 2

Jaisalmer News:राजस्थान के राज्य पक्षी Great Indian Bustard यानि गोडावन का अस्तित्व अगले पांच सालों में पूरी दुनिया से मिट जाएगा| विषेषज्ञों का मानना है कि पूरी दुनिया में अब गोडावन केवल जैसलमेर के ही वन्य इलाकों में बचे हैं लेकिन इनके संरक्षण के लिये हो रहे नाकाफी प्रयास इस सुन्दर पक्षी की संख्या को लगातार घटाते जा रहे हैं।

जैसलमेर बाडमेर के 3162 वर्ग किलोमीटर में फैले राष्ट्रीय मरू उद्यान (Desert Natonal Park) में पिछले दो दषकों से गोडावन (Godavan)के संरक्षण को लेकर मषक्कत की जा रही है लेकिन यहां भी लगातार घट रही गोडावन की संख्या चिन्ता का विषय बन रही है। इलाके में बढते आबादी के दबाव और तकनीकों के इस्तेमाल के चलते गोडावण लगातार सिमटते ही जा रहे हैं और संभावना भी जताई जा रही है कि वो दिन भी दूर नहीं जब आने वाली पीढी प्रदेश के इस राज्य पक्षी को धरातल की बजाय किताबों में ही देख पाएगी।

बात करें अगर राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावन की तो बेहद शर्मनाक आंकडे सामने आते हैं। जी हां राजस्थान का राज्य पक्षी माना जाता है गोडावन और इस गोडावन को बचाने के लिये सरकार द्वारा प्रतिवर्ष लाखों करोडों रूपये का खर्च कर बडी बडी योजनाएं बनाई जाती है लेकिन इन योजनाओं के सच की हवा इतने मात्र से निकलती नजर आती है कि जो गोडावन 1980 में 1250 के करीब थे वो अब सौ की संख्या में सिमट कर रह गये हैं। बहुत बड़ा सवाल है पिछले सालों में गोडावन संरक्षण के नाम पर हुए बडे खर्च को न्यायोचित ठहराने के लिये कि सरकार आखिर कर क्या रही है? क्या गोडावन के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ती की जा रही है या फिर वास्तव में इस स्टेट बर्ड को बचाने के लिये भी कोई चिन्तित है भी या नहीं?

प्रदेश की पहचान के रूप में इस पंछी को माना जाता है। राज्य पक्षी होने के चलते इसके संरक्षण एवं विकास के लिये राज्य सरकार की विशेष जिम्मेदारी भी बनती है और पिछले कई दशकों से सरकार अपनी ये जिम्मेदारी निभा भी रही है लेकिन यह जिम्मेदारी धरातल पर कितनी और कागजों में कितनी निभ रही है इसका आंकलन केवल इस बात से किया जा सकता है कि कभी 1250 से भी अधिक संख्या में पाये जाने वाला गोडावन अब केवल सौ की संख्या से नीचे सिमट कर रह गया है।

दुनिया के सबसे बड़े, वजनी और उड़ने वाले परिंदों की लिस्ट में शामिल ये पक्षी धीरे धीरे  कम होते जा रहे हैं जिससे इसके वजूद पर खतरा मंडरा रहा है। एक समय वह भी था जब गोडावन पक्षी भारत के साथ पाकिस्तान में भी बड़ी तादाद में पाए जाते थे। 19वीं सदी के शुरुआत में भारत के तटीय इलाकों में इनके बड़े बड़े  झुंड दिखा करते थे। शिकार और प्रवास के घटते ठिकाने इनके वजूद पर भारी पड़े। भारत में ये राजस्था नए गुजरात में कच्छ के रण, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं। इससे पहले देश के 11 राज्यों में इसकी मौजूदगी पाई जाती थी। पूर्ण रूप से विकसित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की ऊंचाई करीब एक मीटर तक होती है और इसका वजन 15 किलो के आसपास होता है।

राजस्थान सरकार ने हाल में इस पक्षी को बचाने के लिए एक बड़ी परियोजना की शुरुआत की है, लेकिन जानकार विशेषज्ञों का कहना है कि बेहद खतरे में आ गई इस प्रजाति को बचाने के लिए सरकारी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इनके प्रवास के ठिकानों को मकान बनाने और दूसरे निर्माण करने के लिए सुनियोजित तरीके से तबाह किया जा रहा है। इसके साथ ही शिकार और आवारा पशु भी इनके लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।

गोडावन की संख्या बढ़ाने के लिए इनके लिए सुरक्षित क्षेत्र बनाना जरूरी है जो कि अब समय के साथ सिमटता जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो अब पूरे देश में गोडावनों की संख्या सौ में सिमट कर रह गई और और पूरे देश के 70 प्रतिशत गोडावन राजस्थान के जैसलमेर जिले में ही है ऐसे में प्रदेश की शान का सूचक माने जाने वाले इस परिंदे के संरक्षण के लिये सरकारों को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

Shankar Dan
Journalist
Jaisalmer
9799069952
7014502021