Tiddiyon Ki Biryani Pakistan

Exclusive Story For The Jaisalmer News On Locust Biryani And Locust Fry By Dilip Soni “Nachna”.

पिछले कुछ दिनों से भारत के प्रमुख समाचार पत्रों और न्यूज़ पोर्टल पर टिड्डी दल (Locust) के हमले के साथ ही पाकिस्तान में टिडडी बिरयानी खाने के बारे में बड़ा हो हल्ला हो रहा है।

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार में सिंध सूबे से मंत्री मोहम्मद इस्माइल ने लोगो को सलाह दी है कि टिडडी की बिरयानी (Tiddiyon Ki Biryani) कढ़ाई चिकन बनाकर खाएं।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध इलाके में कई जगह ढाबों पर टिडडी से बने व्यंजन बिक रहे है।

Tiddi Recipe-Tiddi Biryani-Tiddi Kadhai-Tiddi Fry
Various Tiddi Dish Recipe Popular In Pakistan Tharparkar District

पाकिस्तान के छाछरो इलाके में सबसे ज्यादा टिडडी रेस्टोरेंट पर बेची जा रही है। यंहा के लोग टिड्डी को खाकर फसलों के नुकसान की भरपाई कर रहे है।

अगर बात खबरों से आगे निकलकर हकीकत की करें तो थार रेगिस्तान में बसे भारत के जैसलमेर,बाड़मेर, बीकानेर तथा पाकिस्तान के बलूचिस्तान, थारपारकर जिलों और बॉर्डर से जुड़े गांवों के लोग सदियों से टिडडी खाते रहे है।

आपको बता दें कि टिड्डियों और कुछ अन्य कीड़ों में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है। पश्चिम देशों में खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए भविष्य में कीड़ों से बने प्रोटीन उत्पाद प्रयोग करने पर काफी प्रयोग हुवे है।

ये है टिड्डियो की बिरयानी और टिड्डी फ्राई बनाने का तरीका

थारपारकर जिले के एक ढाबे वाले ने टिडडी पकाने का तरीका बताते हुवे कहा कि “इसकी टांग और पेट की गंदगी वाला हिस्सा निकाल के इसको सुखाया जाता है” फिर ग्राहक की जरूरत के हिसाब से इसकी फ्राई,बिरयानी बनाई जाती है।

चावल के साथ टिड्डी को पकाकर टिड्डी बिरयानी बनाई जाती है वंही इन्हें फ्राई कर नींबू के साथ परोसा जाता है।

अरब के देशों में भी टिडडी खाने का प्रचलन है, टिडडी को सुखाकर कई महीनों तक काम मे लिया जाता है।

पाकिस्तान भारत और अरब देशों के अलावा थाईलैंड,मेक्सिको,युगांडा और चीन के लोग टिडडी और कॉकरोच को खाते रहे है।

जैसलमेर के सिंधी मुसलमान कम्युनिटी के कुछ बुजुर्गों से टिडडी खाने के बारे में पूछा गया तो वे हंसने लगे। फिर उन्होंने बताया कि ये सही है।

नाम ना छापने की शर्त पर एक बुजुर्ग ने कहा कि ” टिडडी दल आने पर वे लोगो टिड्डियों को बोरों में भरकर सूखा लेते थे। फिर उन्हें सेककर खाया जाता था।”

उन्होंने बताया कि छोटे बच्चे अपनी माँ से “तिड” (स्थानीय भाषा मे टिडडी का नाम) की मांग करते थे और सिकी हुई टिड्डियों को जेबों में भरकर कुरकुरे की तरह खाते थे।

हाल के वर्षों में टिडडी खाई जाती है या नहीं इस बारे में जानकारी देने से उन्होंने मना कर दिया।

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News & Image Source: Lens | Daily Times | GEO TV | Mangobaaz