tiddi hamla jaisalmer
राजस्थान में पाकिस्तान की सीमा से लगते जैसलमेर-बाड़मेर इलाके में 26 साल बाद एक बार फिर ‘घुसपैठिए’ भारतीय सीमा में दाखिल हो गए हैं. साल 1993 में सितंबर और अक्टूबर के बीच इन घुसपैठियों ने किसानों की पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर दिया था. हम बात कर रहे हैं टिड्‌डी दल और उनके फसलों पर हमले (Locust Attack) की. जैसलमेर के पोकरण इलाके में तेजी से बढ़ रहे टिड्डी दल की खबर ने एक बार फिर किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इसे लेकर चिंता जताई है.
कृषि विभाग के अनुसार पाकिस्तान से 21 मई को एक दल फलौदी इलाके में आया था. इसके बाद केंद्रीय टीम और कृषि विभाग की टीमें टिड्‌डी दल की तादाद और मौजूदगी का पता लगाकर नियंत्रण में जुट गईं. तीन दिन पहले ही पाकिस्तानी इलाके से एक और टिड्‌डी दल पोकरण इलाके में पहुंचा. इसके बाद सरकार की भी चिंता बढ़ती दिखी और कीटनाशक छिड़काव में तेजी लाई गई.
हमें चिंता यह भी है कि अभी राजस्थान के अंदर टिड्डी दल आ गया है. पाकिस्तान की तरफ से आता है और वह हमला करता है हमारे यहां पर और फसलों को नष्ट कर देता है, अभी हमला किया हुआ है जैसलमेर पर. हमने अपने विभागों को कहा है कि आप केंद्र सरकार के नजदीक रहे क्योंकि केंद्र सरकार ही आगे आकर जो कदम उठाने पड़ते हैं उठाती है. पहले भी ऐसे हमले हुए हैं फसलें चौपट नहीं हो जाए किसानों की चिंता मुझे लगी हुई है. मैंने अपने अधिकारियों से बात करी है, जरूरत पड़ेगी तो और हम आगे की कार्रवाई करेंगे.
— अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री, राजस्थान

1998 में टिड्‌डी दल ने किया था हमला

राजस्थान में पाकिस्तानी सीमा से 1998 में भी टिड्‌डी दल ने हमला किया था. तब भी टिड्‌डी अटैक परेशानी का सबब बना था लेकिन 1993 में खरीफ और रबी दोनों फसलों को चट कर गया था. उसे कंट्रोल करने में सरकार के पसीने छूट गए थे. यही कारण है कि अब जैसलमेर इलाके में टिड्‌डी दल को देखे जाने पर उन्हें तुरंत प्रभाव से नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है.
राजस्थान के कृषि विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर (प्लांट प्रोटेक्टशन) डॉ. सुआलाल जाट ने बताया कि जैसलमेर इलाके में टिड्‌डी पर स्थिति नियंत्रण में है. अभी इलाके में फसल का ऑफ सीजन है और टिड्‌डी अटैक से फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचने वाला है. टिड्‌डी दल घासफूस या जंगल में देखा गया है और वहीं पर उस पर कीटनाशक छिड़का जा रहा है.
वयस्क टिड्डी झुंड एक दिन में 150 किमी तक हवा के साथ उड़ सकता हैं. वयस्क टिड्‌डी हर दिन ताजा खाना खाता है और वह अपने वजन जितना खा सकता है. एक अनुमान के अनुसार एक बहुत छोटा झुंड एक दिन में लगभग 35,000 लोगों जितना खाना खाता है. यही कारण है कि किसानों को अपनी फसलों को लेकर चिंता सता रही है.
वही कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (इंफार्मेशन) डॉ. अतर सिंह मीणा ने बताया कि जैसलमेर के पोकरण और मोहनगढ़ इलाके में टिड्‌डी दल देखे गए हैं. कृषि विभाग की टीम और भारत सरकार के टिड्‌डी नियंत्रण विभाग की टीम मिलकर नियंत्रण में जुटी है. स्थिति पूर्ण नियंत्रण में है.
टिड्‌डी दल पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग और केंद्र सरकार के टिड्‌डी नियंत्रण विभाग की टीमें पूरे इलाके में सक्रिय हैं. सोमवार तक क्षेत्र के 700 हेक्टेयर इलाके में टिड्‌डी दलों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जा चुका है.
खरीफ फसल में इस इलाके में बाजरे और ग्वार की बुवाई के साथ ही फलदार फसलों में अमरूद, आंवला, बेर और अंगूर की खेती होती है. हाल ही हुई बारिश के बाद कुछ इलाकों में बाजरे की बुवाई हो चुकी है. कुछ समय बाद फसल के लहलहाने का समय आने वाला है और ऐसे में टिड्‌डी के खतरे पर अभी चेता नहीं गया तो आगे खतरा बढ़ सकता है.
द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावन भी इसी इलाके में पाया जाता है. टिड्‌डी गोडावन का भोजन भी होती है. ऐसे में टिड्‌डी दल को कंट्रोल करने के लिए पूरे इलाके में कीटनाशक छिड़काव करने से जहर वाली टिड्‌डी गोडावन का भोजन बनने की आशंका है. ऐसा होता है तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे कैपटिव ब्रीडिंग और अंडा संरक्षण केंद्र पर भी संकट आ सकता है. रामदेवरा के पास बनाए जा रहे इस केंद्र के इलाके में विचरण करने वाले गोडावन की रक्षा के लिए अब अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा भी आगे आई है. सभा की ओर से गोडावन संरक्षण के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है.