• आगामी 3 दशकों के लिए सुनियोजित ग्राम्य विकास का खाका तैयार होगा
  • ग्रामसेवक एवं पटवारी बेहतर ढंग से बनाएं मास्टर प्लान – प्रधान फकीर

जैसलमेर, 21 नवम्बर/मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2019-20 के तहत प्रत्येक गांवाें का आगामी 30 वर्षों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नियोजित मास्टर प्लान बनाया जाएगा। मास्टर प्लान वर्ष 2050 तक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए गांवों में मास्टर प्लान बनाएं जाएंगे, जिसमें भविष्य के लिए क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य, आबादी विस्तार, खेल सुविधाए, पार्क, सरकारी भवनों, सड़क एवं अन्य विकास की आवश्यकताओं का आंकलन कर भूमि का चिह्निकरण कर पटवारियाें के सहयोग से बनाया जाएगा।

जैसलमेर पंचायत समिति के प्रधान अमरदीन फकीर ने ग्रामसेवकों एवं पटवारियों के साथ ही सरपंचों से कहा कि वे राज्य सरकार के मंशा के अनुरूप गांवों का मास्टर प्लान आगामी 2050 तक की सुविधाओं एवं आवश्यकताआें को ध्यान में रखते हुए समय सीमा में बनाएं ताकि उनके द्वारा बनाया गया प्लान यादगार साबित हों।

प्रधान अमरदीन ने गुरुवार को पंचायत समिति जैसलमेर में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की ओर से आयोजित मास्टर प्लान के संबंध में सरपंचों, ग्रामसेवकों, पटवारियों के प्रशिक्षण के दौरान यह आह्वान किया।

उन्होंने ग्रामसेवकों एवं पटवारियों से कहा कि प्रत्येक ग्राम की आगामी 30 वर्षाे की विभिन्न आवश्यकताओं एवं सामुदायिक विकास को ध्यान में रखते हुए बहुपयोगी मास्टर प्लान बनाएं ताकि आने वाली पीढ़ी को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं झेलनी पड़े। उन्हाेंने आशा जताई कि जैसलमेर पंचायत समिति का मास्टर प्लान सबसे उच्च स्तर का होना चाहिए उसी अनुरूप कार्य को अंजाम मिल सके।

विकास अधिकारी हीरालाल कलबी ने 31 दिसम्बर से पूर्व मास्टर प्लान को बनाने के लिए यग्रामसेवकों को निर्देश दिए और इस संबंध में किए जाने वाले कायार्ें के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए पटवारियों से कहा कि वे विलेज मास्टर प्लान बनाने के लिए भूमि के चिह्निकरण की कार्यवाही भी निर्धारित समय सीमा में करें। साथ ही सरपंचों से भी आग्रह किया गया कि वे इस मास्टर प्लान में अपनी अहम भूमिका अदा करें।

दक्ष प्रशिक्षण फकीरचंद ने पीपीपी के माध्यम से संभागियों को 2050 तक की गांवों की आवश्यकताओं, वर्तमान सुविधाओं को सूचीबद्ध करने, नजरी नक्शा तैयार करने, विभिन्न भूमियों का चयन करने, जनसख्ंया को देखते हुए भूमि को चिह्नित करने, पर्यावरण संरक्षण, पशुधन के लिए चारागाह विकसित करने की जानकारी दी और इसमें समाहित की जाने वाली अन्य सभी जरूरी सुविधाओं के बारे में प्रशिक्षण दिया और स्पष्ट रूप से प्रत्येक गांव के बनने वाले मास्टर प्लान की तैयारी के बारे में परिचित कराया।