sabhapati ki ladai

Jaisalmer News: त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी जैसलमेर नगर परिषद सभापति सीट का मंगलवार को फैसला होगा. आज की रात कत्ल की रात है, पहले जंहा ब्राह्मण सभापति बनने के चांस बहुत ज्यादा थे अब कांग्रेस, निर्दलीय और बीजेपी के बराबर चांस बताये जा रहे है.

बीजेपी शुरू से बिल्ली मौसी बनी दो बंदरों की लड़ाई का आनंद ले रही है, बीजेपी को इंतजार है कि दोनों बंदर लड़ते लड़ते छींका तोड़ दे और सारी दूध मलाई उसके हिस्से आ जाएँ. अब उसकी आस ऊपर वाला सुनता है या नहीं इसका पता कल ही चलेगा.

जंहा तक जैसलमेर में ब्राह्मण सभापति बनने का मामला था उसमें अगर फ़क़ीर और रुपाराम के गुट नहीं बनते तो ब्राह्मण सभापति बनना तय था. मगर अब एक दुसरे पर विश्वास कम और शक ज्यादा हो रहा है.

इसी शक में अगर क्रोस वोटिंग हो गई तो बीजेपी के विक्रम सिंह का भाग्य चमक सकता है. हालाँकि बताया जा रहा है कि बीजेपी ने भी राजपूत प्रत्याशी उतारकर गलती की है. अगर बीजेपी की तरफ से माहेश्वरी या अन्य कोई सभापति का प्रत्याशी होता तो बीजेपी को ज्यादा वोट पड़ते.

निर्दलीय प्रत्याशी हरिवल्लभ कल्ला शुरू से ही दावेदार है पर उनके साथ कुछ नकारात्मक चीजें जुड़ गई है, पहले बीजेपी प्रत्याशी पर दबाव से निर्विरोध होना फिर पार्टी से बगावत कर निर्दलीय सभापति का चुनाव लड़ना और उसके लिए की गई साम दाम दंड भेद की राजनीति उल्टी भी पड़ सकती है.

कांग्रेस प्रत्याशी की तरफ से कोई ज्यादा हाय हल्ला नहीं है, कमलेश छंगाणी को उम्मीद है कि पार्टी की जो उन्होंने इतने साल सेवा की है उसका फल उन्हें सभापति के रूप में मिलेगा.

जैसलमेर की राजनीति में कल का दिन बहुत अहम होगा जंहा फ़क़ीर और रुपाराम की लड़ाई खुलकर सामने आएगी वंही दोपहर तक परिणाम आने तक सबकी साँसे अटकी रहेगी.

भारत -पाकिस्तान के मैच की तरह लोग इस खबर का इंतजार करेंगे की कौन बना जैसलमेर का अगला करोडपति 🙂 मतलब सभापति .