Pandit Dayanand Shastri
Pandit Dayanand Shastri Ujjain.

उद्धव ठाकरे कल 28 नवम्बर 2019 को शाम 6.40 बजे मुम्बई में शपथ ग्रहण करेंगे।

Uddhav Thackeray Kundali Analysis By Pandit Dayanand Shastri

महाराष्ट्र में चल रहे सियासी ड्रामे के मध्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस ( Devendra Fadnavis ) द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray ) महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री (CM of Maharashtra) बनने जा रहे हैं। 

कल 28 नवम्बर 2019 (गुरुवार) को शपथ ग्रहण के समय कुंडली (Kundali) में चंद्रमा धनु राशि में रहेगा और सरकार का गठन शनि की साढ़ेसाती के बीच होगा। 

इस बीच कुंडली के सारे ग्रह राहू व केतू के मध्य आ जाने के कारण काल सर्प योग (Kaal Sarpa Yog) भी बन रहा है जोकि ज्योतिष के लिहाज से शुभ स्थिति नही बनाती है।

Uddhav Thackeray CM Shapath Kundali

Uddhav Thackeray  Shapath Grahan Kundali
Uddhav Thackeray Shapath Grahan Kundali

शपथ ग्रहण के समय केतू की महादशा में गुरु की अतर्दशा चल रही है और गुरू कुंडली में अष्टम भाव का स्वामी है। यह अतर्दशा जुलाई 2021 तक चलेगी और इस दौरान सरकार के सहयोगियों के मध्य विवाद जलते रहेंगे।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि कल  शपथ ग्रहण की कुंडली वृषभ लग्न की बनती है और लग्न का स्वामी शुक्र आठवें भाव में शनि, गुरु व केतु के साथ स्थित है। 

लग्र के स्वामी का आठवें भाव में चले जाना अपने आप में अशुभ संकेत है क्योंकि आठवें भाव में दुश्मन की राशि में जाकर शुक्र कमजोर हो गया है और राहु-केतु के मध्य सभी ग्रहों के आने का मतलब यह है कि सरकार अंतर विरोध और आंतरिक साजिश का शिकार हो सकती है।

उद्धव ठाकरे कल 28 नवम्बर 2019 को शाम 6.40 बजे मुम्बई में शपथ ग्रहण करेंगे।

ज्योतिष के नियमानुसार शपथ ग्रहण के लिए यह समय अच्छा नहीं है और यदि इस समय पर शपथ ग्रहण ली गई तो सरकार लंबी नहीं चलेगी।शपथ ग्रहण के समय कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी मंगल छठे भाव में है और मंगल की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है।

मंगल ही कुंडली में बाहरी समर्थन वाले 12वें भाव का भी मालिक है और छठे भाव में बुध में जाने और राहु से दृष्टिगत होने के कारण इसकी स्थिति भी कमजोर हो गई है। 

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार कल शपथ ग्रहण कुंडली में चंद्रमा केतू के मूल नक्षत्र में स्थित है और यह गंडमूल का नक्षत्र है जिसे ज्योतिष के लिहाज से अशुभ माना जाता है।

सिर्फ चंद्रमा ही नहीं बल्कि गुरू और शुक्र भी मूला नक्षत्र में हैं। इसके साथ ही साझेदारी वाले घर का मालिक मंगल राहू के नक्षत्र में है। मंगल इस कुंडली में बाहरी समर्थन के 12वें भाव का भी मालिक है।

ऐसी हैं उद्धव ठाकरे की जन्म कुण्डली – Uddhav Thackeray Janam Kundali


उद्धव ठाकरे का जन्म 27 जुलाई 1960 को हुआ था। उनका जन्म 10 बजकर 14 मिनट पर मुंबई में माना जाता है. उद्धव ठाकरे की जन्म कुंडली कन्या लग्न की है।

Uddhav Thackeray Janam Kundli
Uddhav Thackeray Janam Kundali

उद्धव ठाकरे को राजनीति अपने पिता स्वर्गीय बाल ठाकरे से विरासत में मिली है। कन्या लग्न की उद्धव ठाकरे की कुंडली में दशम भाव में बैठे बुध और एकादश भाव में बैठे सूर्य और शुक्र ने उनको राजनीति में आने से पहले एक अच्छा फ़ोटोग्राफर बनाया।

कला प्रेमी उद्धव ठाकरे की कुंडली में गुरु धनु राशि में चौथे घर में शनि के साथ स्थित है जिस पर नवम भाव से अष्टमेश मंगल की दृष्टि पड़ रही है। वर्तमान में गुरु में बुध की विंशोत्तरी दशा में चल रहे उद्धव ठाकरे को साधारण सफलता मिलने का योग है।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की कन्या लग्न की कुंडली में गुरु में केतु की अंतर्दशा ने उनके हाथ से सत्ता ऐसे छीन ली जैसे हाथ आई मछली छूटकर गहरे जल में उतर जाती है।

उद्धव ठाकरे की कुंडली में गुरु को अष्टमेश मंगल देख रहा है और केतु विवाद स्थान यानी छठे भाव में बैठे हुए हैं। जो इनका अमंगल कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, उनका जन्म कुण्डली में गुरू भी चौथे भाव में है, जो कन्या लग्न की कुंडली में शुभ नहीं माना जाता। ठाकरे के दुर्भाग्य में इसका बड़ा अहम किरदार रहा है।

कन्या लग्न होने के कारण गुरु योग कारक नहीं है और उनकी कुंडली में गुरू को केंद्र का दोष भी लगा हुआ है इसलिए उनका राजनीतिक करियर हमेशा उथल-पुथल रहता है।

इस गुरू की महादशा लगभग साल 2028 रहेगी। ये कहना गलत नहीं होगा कि अगले करीब एक दशक तक उनकी परेशानियां कम नहीं होने वाली हैं।

हालांकि उद्धव ठाकरे के राजनीति करियर को चमकाने के लिए लग्नेश स्वराशि का बुध का कर्म स्थान में मजबूती से बैठे रहना काफी नहीं हैं।

उद्धव ठाकरे की कुंडली में लग्नेश स्वराशि का बुध कर्म स्थान में बैठा हुआ है, जो उनके व्यक्तित्व, प्रभाव को बेहतर बनाए हुए है।

शिवसेना के उद्धव ठाकरे की कुंडली में गुरु की महादशा में केतु की अन्तर्दशा चल रही है। केतु की अन्तर्दशा में उनकी कठिनाई बढ़ी हुई नजर आ रही है।