राज्यों के भारी कोरोना उपकर से शराब की बिक्री आधी हुई : सीआईएबीसी

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नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। द कंफेडेरेशन आफ इंडियन अल्कोहोलिक बीवेरेज (सीआईएबीसी) ने कहा है कि राजस्व बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में कोरोना उपकर लगाने वाले राज्यों में शराब की बिक्री में आधे से अधिक गिरावट आई है।

सीआईएबीसी ने रविवार को यहां कहा, लॉकडाउन के कारण राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए शराब की बिक्री पर भारी कर के जरिए कमाई का विभिन्न राज्य सरकारों का विचार उल्टा पड़ गया है।

सीआईएबीसी के आंकड़ों के मुताबिक, जिन राज्यों ने कोई कोरोना उपकर नहीं लगाया या फिर कम कर (0-15 फीसदी) लगाया, वहां शराब की बिक्री 16 फीसदी तक घटी है। वहीं जिन राज्यों ने 50 प्रतिशत से अधिक कोरोना उपकर लगाया, वहां बिक्री 59 फीसदी तक कम हो गई है।

मई और जून के आंकड़ों की तुलना में, जब शराब के कारोबार को बंद करने के छह सप्ताह के बाद शराब का व्यापार फिर से खोल दिया गया, सीआईएबीसी ने तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। एक वर्ग में वह राज्य शामिल हैं, जहां कोरोना उपकर 15 प्रतिशत तक लगाया गया है। दूसरे वर्ग में 15 से 50 फीसदी उपकर वाले राज्य और तीसरे वर्ग में 50 फीसदी से अधिक उपकर लगाने वाले राज्यों को शामिल किया गया है।

सीआईएबीसी के महानिदेशक विनोद गिरी ने कहा कि साल भर पहले के महीनों के साथ मई और जून के आंकड़ों की तुलना करें तो पहले वर्ग के राज्यों में शराब की बिक्री 16 फीसदी गिर गई, दूसरे वर्ग में 34 फीसदी और तीसरी वर्ग में 59 फीसदी बिक्री कम हुई है।

गिरी ने कहा, इससे पता चलता है कि कर बढ़ने से सबसे अधिक संभावना है कि पूर्ण रूप से संग्रह में वृद्धि नहीं हुई। वास्तव में जून में जब अनलॉक होना शुरू हुआ तो उन राज्यों में बिक्री में सुधार देखने को मिला, जिनमें कम उपकर लगाया गया है।

–आईएएनएस

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