लाइफ मिशन घोटाले में सीबीआई की जांच जारी रहे : केरल हाईकोर्ट

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तिरुवनंतपुरम, 12 जनवरी । केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को लाइफ मिशन घोटाले में राज्य सरकार द्वारा दायर की गई दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि उच्च सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों से जुड़े मामले की सीबीआई जांच जारी रहनी चाहिए।

मामला दरअसल केरल सरकार के फ्लैगशिप लाइफ मिशन प्रोजेक्ट में विदेशी योगदान नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य 2018 में विनाशकारी बाढ़ के दौरान घरों को खोने वाले गरीबों के लिए घर उपलब्ध कराना है।

केरल सरकार के वकील और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केके विश्वनाथन ने न्यायमूर्ति पी. सोमराजन की अदालत में दलील दी कि मामले में सीबीआई जांच नहीं की जा सकती क्योंकि वैधानिक निकायों को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों से छूट दी गई है।

राज्य के वकील ने तर्क दिया कि सीबीआई जांच के आगे बढ़ने से पॉलिसी पारालाइसिस की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी और उच्च न्यायालय को इसे रोकना चाहिए।

दूसरी ओर, सीबीआई के अधिवक्ता शष्ठमंगलम अजितकुमार ने तर्क दिया कि निजी कंपनी यूनिटेक केरल सरकार की निकाय लाइफ मिशन के लिए निर्माण का कार्य कर रही है, जिसने निविदा के माध्यम से अनुबंध प्राप्त नहीं किया है।

अजितकुमार ने कहा कि परियोजना के तहत 97 अपार्टमेंट और एक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाना था, जिसमें दावा किया गया कि सोना तस्करी के मामले में आरोपी स्वप्न सुरेश और अन्य सह-आरोपियों ने अप्रूवल और फाइल संबंधी अन्य मूवमेंट के लिए यूनिटेक के साथ बातचीत की और परियोजना लागत का 30 प्रतिशत कमीशन तय किया। इस 30 प्रतिशत कमीशन में 20 प्रतिशत यूएई के एक अधिकारी और 10 प्रतिशत स्वप्ना सुरेश और अन्य सह-अभियुक्तों को दिया जाना था।

सीबीआई के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि वरिष्ठ सरकारी अधिकारी घोटाले में शामिल हैं, इसलिए केंद्रीय एजेंसी द्वारा एक पूर्ण जांच आवश्यक है, जिसे अदालत ने अनुमति दे दी।

–आईएएनएस

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