कैशलेस चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं कराने के लिए एमसीडी को फटकार

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नई दिल्ली, 13 जनवरी । दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को तीनों नगर निगमों की खिंचाई की और सदस्यता शुल्क जमा करने के बावजूद सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं कराने के लिए नोटिस जारी किया।

अखिल दिल्ली प्राथमिक शिक्षा संघ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दक्षिण, उत्तरी और पूर्वी दिल्ली नगर निगमों ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों से सदस्यता शुल्क ले ली है, लेकिन इस सुविधा का विस्तार करना अभी बाकी है।

याचिकाकर्ता ने कहा, कर्मचारियों को पहले पैसा जमा करना पड़ता है और बाद में एमसीडी के स्वास्थ्य विभाग से पैसा वापस(रिंबर्समेंट) लेना पड़ता है, जिसमें काफी समय लगता है। यह बिल्कुल अनुचित और अवैध है।

इसमें कहा गया है, इस कोरोनावायरस महामारी की अवधि के दौरान, बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों, जिन्हें समय पर पेंशन नहीं मिली, उन्हें अपने इलाज के लिए पैसे की व्यवस्था करने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि अस्पतालों ने कैशलेस उपचार प्रदान नहीं किया।

न्यायमूर्ति डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने तीनों नगर निगमों के प्रति निराशा दिखाई और कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी न केवल मेडिकल बिल के मुद्दों के कारण पीड़ित थे, बल्कि लंबे समय से वे पेंशन राशि भी नहीं पा रहे थे।

अदालत ने नगर निगमों की खिंचाई करते हुए कहा, यदि आप अस्पतालों के साथ टाई-अप नहीं करते हैं तो आप कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए सदस्यता शुल्क कैसे ले सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पहले 39,000 रुपये की सदस्यता ली जाती थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है। इस पर, अदालत ने तीनों नगर निगमों को नोटिस जारी किया, उन्हें सभी विवरणों के साथ एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया और मामले को 22 जनवरी को सूचीबद्ध किया।

–आईएएनएस

आरएचए/एएनएम