भांग की खेती पर गोवा के मंत्रियों की राय जुदा-जुदा

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पणजी, गोवा में 30 दिसंबर औषधीय उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को विनियमित करने के मामले में गोवा की मंत्रियों की अलग-अलग राय है। इससे एक दिन पहले कानून मंत्री नीलेश कैबरल ने इस तरह के प्रयास की जोरदार पैरवी की थी।

बुधवार को पणजी में पत्रकारों से बात करते हुए, कला और संस्कृति मंत्री गोविंद गौड़े ने कहा कि इस कदम से रोजगार पैदा करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे प्रतिकूल सामाजिक प्रभाव भी हो सकता है। इससे पहले दिन में, उन्होंने कहा था कि उन्हें यह भी नहीं पता है कि भांग क्या होता है।

गौड़े ने संवाददाताओं से कहा, मुझे यह भी नहीं पता है कि भांग क्या होता है। क्या इसका इस्तेमाल गांजा के लिए किया जाता है या औषधीय उद्देश्यों के लिए, मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता। मैं सबसे पहले इसका अध्ययन करूंगा।

उन्होंने कहा, अगर हम इसे रोजगार के दृष्टिकोण से देख रहे हैं, तो हमें उन परिवारों के लिए सोचना चाहिए, जो इस तरह के निर्णय के कारण नष्ट हो सकते हैं।

पर्यटन मंत्री मनोहर अजगांवकर के अनुसार, इसपर अध्ययन किया जाना चाहिए। यह एक ऐसा मामला है जो लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित है। गोवा में भांग की कानूनी खेती की अनुमति देने से पहले विशेषज्ञों से परामर्श की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, इसपर अध्ययन किया जाना चाहिए और इस तरह के निर्णय लेने से पहले एक रिपोर्ट संकलित करने की आवश्यकता है .. यदि विशेषज्ञ हमें अच्छे इनपुट देते हैं, तो सरकार इसके साथ आगे बढ़ सकती है, लेकिन इसपर एक उचित अध्ययन किए जाने के बाद ही कदम उठाना चाहिए।

प्रस्ताव का विरोध करते हुए विपक्ष ने दावा किया कि यह निश्चित ही राज्य के लिए विनाशकारी होगा। पर्यटन पर निर्भर राज्य वैसे भी पहले से ही एक नार्को-पर्यटन स्थल के रूप में बदनाम है।

वहीं मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है और इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत है। कानून मंत्री नीलेश कैबरल ने कहा है कि भांग को पहले ही कानूनी रूप से सात राज्यों में बेचा जाता है।

गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि इससे गोवा के युवा बर्बाद हो सकते हैं।

गोवा फॉरवर्ड के अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री विजई सरदेसाई ने पूछा, इससे गोवा के युवाओं को क्या फायदा होगा? क्या यह उनके भविष्य के लिए जरूरी है?

–आईएएनएस

आरएचए/एसजीके