सुशांत सिंह राजपूत की जन्म कुंडली के ग्रह नक्षत्र एवं उनकी आत्महत्या के कारण

Sushant Singh Rajput Janm Kundali Birth Chart and suicide reason

ऐसे थे सुशांत सिंह राजपूत की जन्म कुण्डली (Kundli of Sushant Singh Rajput) के ग्रह नक्षत्र एवम उनकी आत्महत्या के कारण- By Pandit Dayanand Shastri

छोटे पर्दे पर धाक जमाने के बाद, डांस रियलिटी शो से होकर बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुके, हम सभी को छोड़कर अचानक आत्महत्या करने वाले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की उपलब्ध जन्म कुंडली (Birth Chart) पर विचार करते हैं।

उन्होंनें बहुत कम समय में अभिनय के क्षेत्र में चुनौतिपूर्ण किरदारों को छोटे व बड़े पर्दे पर आत्मसात किया, चाहे वह “पवित्र रिश्ता” के मानव दामोदर देशमुख हों या फिर फ़िल्म “काय पो छे” के ईशान भट्ट, या फिर प्रख्यात जासूस व्योमकेश बख्शी।

काय पो छे, शुद्ध देशी रोमांस, व्योमकेश बख्शी (2015) व पीके (2014 में) जैसी फिल्में करने के बाद सुशांत ने क्रिकेट जगत के जीते जागते व अब तक के सबसे सफल भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के किरदार को वर्ष 2016 में बड़े पर्दे पर अभिनीत किया “एम.इस.धोनी -द अनटोल्ड स्टोरी (2016)। सोन चिरैया में भी उनकी दमदार भूमिका थी।

21 जनवरी 1986 को बिहार प्रांत के पटना के निकट पूर्णिया जिले के महिदा में जन्में सुशांत सिंह राजपूत का पैतृक घर पूर्णिया के बड़हरा कोठी के मलड़िया गांव में स्थित हैं। जब सुशांत 16 वर्ष के तभी उनकी माताजी का निधन हो गया था जिनसे उन्हें बहुत लगाव था।

सुशांत ने पटना के राजीव नगर इलाके में स्थित घर से पटना के ही सेंट करेन्स हाई स्कूल में पढ़ाई की थी।वर्ष 2004 में सुशांत दिल्ली में बस गए थे। जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई कुलची के “हंसराज मॉडल स्कूल” से की थी। उन्होंने मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई दिल्ली के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कई थी।अपने सभी एक्जाम उन्होंने सफलता पूर्वक क्लियर किये थे।धनबाद स्थित आई एस एस के भी। सुशांत ने फिजिक्स के नेशनल ओलम्पियाड को जीत था।

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सुशांत सिंह राजपूत (34 वर्ष) की जन्म कुंडली का विश्लेषण

  • नाम – सुशांत सिंह राजपूत जन्म तिथि- 21 जनवरी 1986
  • जन्म स्थान- पटना।
  • जन्म समय- 12:00:00 दोपहर।

गूगल पर उपलब्ध इस कुंडली के अनुसार इनका लग्न- मेष, चंद्र राशि वृषभ, जन्म नक्षत्र- रोहिणी, नक्षत्र दूसरा चरण हैं, जहां चन्द्रमा दूसरे चरण में स्थित हैं। वर्तमान महादशा- वृहस्पति की, अंतर्दशा- वृहस्पति की व प्रत्यंतर दशा में भी राहु (26 अप्रेल 2020 से 21 अगस्त 2020 तक) चल रही है।

kundali of sushant singh rajput
Sushant Singh Rajput Janm Kundali By Pandit Dayanand Shastri

सुशांत सिंह राजपूत की कुंडली के अनुसार दशम भाव में बुध व सूर्य के साथ से बुधादित्य योग हुआ हैं, जिसने उनको धन संबंधी कार्यों में सफलता दिलवाई। लेकिन कर्मभाव का बृहस्पति होने से कड़ी मेहनत के बावजूद भी उनको प्रतिफल उतना नहीं मिल पा रहा था। वे पिछले कुछ समय से शनि की साढ़ेसाती के भी शिकार रहे।

लग्नेश राहूं हैं।। धन भाव मे चंद्रमा, मेष राशि मे स्थित था। चन्द्रमा ने वृहस्पति से दृष्ट होकर गजकेसरी योग बना दिया था। लग्न के राहु की पंचम एवम नवम भाव(भाग्येश) पर भी थी।

पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि सप्तम भाव में मंगल केतु ने, वृषभ राशि में अंगारक योग बना दिया था। अष्टम भाव मे वृश्चिक का शनि ही उनको टेक्निकल/इंजीनियरिंग क्षेत्र से जोड़ने का कारक बना।

कर्म स्थान (दशम भाव ) में मकर राशि मे बुध(उत्तराषाढ़ा नक्षत्र)), शुक्र(उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में), सूर्य (उत्तराषाढ़ा नक्षत्र) , एवम वृहस्पति (धनिष्ठा नक्षत्र) बैठे हुए हैं।

सुशांत की आत्महत्या के कारणों को समझने का प्रयास

पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की चन्द्रमा, मन और माँ का कारक होता है।जब भी उसका सम्बन्ध आठवे, बारवे भाव से होने जातक तनाव या डिप्रेशन में चला जाता हैं। उसको समझकर उपाय करने चाहिए। शनि की दृष्टि, चन्द्रमा पर होकर पुरभु योग बन गया था। मन मे उथल होती हैं।

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जब भी चन्द्रमा, राहु या केतु से सम्बंध बनाता तब भी डिप्रेशन चला जाता है। राहु के कारण लटकना, ऊपर से गिरना बनता हैं। यहां 8ठवे भाव का सम्बंध चन्द्रमा बना रहा हैं। यहां चन्द्रमा मारक ओर बाधक की भूमिका बना रहा हैं। बुध,आत्महत्या में सहायक बनता हैं।यही काम राहु केतु भी करते हैं।

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार बुध ने ही उनको मेहनत करके उनको सफलता दिलवाई। बुध, सूर्य के नक्षत्र में हैं। मंगल की भी उल्लेखनीय हैं। आत्महत्या हेतु लग्न भी कारक होता हैं। निर्णय लेने कि क्षमता को प्रभावित करता हैं।

भाव कुंडली मे 12वे का राहु, गुरु को को खराब करता हैं। राहु,मंगल का दृष्टि सम्बंध भी ठीक नही।जो चन्द्रमा का नक्षत्र है। दशम स्थान में मकर राशि में 4 ग्रह स्थित हैं – शुक्र, बुध, सूर्य और गुरु। कर्म स्थान के शुक्र ने ही उनको एक्टिंग फील्ड से जोड़ा । बुध ने इस काम में मदद की।गुरु के कारण सफलता शीघ्र ही मिली।

उनका जन्म चन्द्र की महादशा में हुआ था जो 1986 से 1993 तक चली।चन्द्रमा उच्च का हैं। उसके बाद मंगल की महादशा 1993 से चली जो 2000 तक रही। 2000 से जुलाई 2018 तक राहु की महादशा ने उनको नाम, पैसा, शोहरत दी। लग्नेश राहु हैं। जिसने बहुत मदद की।

पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि मंगल, केतु की दृष्टि, लग्न के राहु पर आपसी दृष्टि सम्बन्ध बना हुआ था। अष्टमेश, शनि की मंगल शत्रुता हैं। शत्रु राशि मे स्थित हैं। मानसिक तनाव बढ़ता है। चिढ़चिढा हो जाता हैं। जिसके कारण चन्द्रमा प्रभावित हो गए। अंतर्मुखी हो जाता है। ऐसा जातक किसी से कोई बात साझा नही करता।

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शनि, केतु की दृष्टि के कारण चन्द्रमा प्रभावित हुए।मंगल की सातवी ओर आठवीं दृष्टि, चन्द्रमा पर ठीक नही। शनि ने यही किया।गुरु की पांचवी दृष्टि ठीक नही रही। गुरु नीच का हो गया। वे अपनी मा को कभी भूल नही पाए। इन सभी की स्थिति 14 जून 2020 को ठीक नहीं थी।

गुरु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा एवम उसमे राहु के प्रत्यंतर ने 14 जून 2020 को सूक्ष्म दशा भी राहु की थी जिसने एक उभरता हुआ कलाकार हमसे छीन लिया।