नाचना में महाराणा प्रताप जयंती पर भव्य कार्यक्रम हुवा 1
जैसलमेर 6 जून: जिले के नाचना कस्बे में आज महाराणा प्रताप जयंती पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कस्बे के किला चौक में आयोजित कार्यक्रम में नाचना क्षेत्र की 14 ग्राम पंचायतों से आये लोगो ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि निरंजन भारती महाराज तथा विशिष्ठ अतिथि के तौर पर फलोदी से कुम्प सिंह पातावत, पोकरण पूर्व विधायक शैतानसिंह राठौड़, जैसलमेर पूर्व विधायक छोटूसिंह भाटी, नाचना ठाकुर विक्रम सिंह, राजेन्द्र सिंह भियाड़,एडवोकेट प्रताप सिंह टेंपू उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुवे एडवोकेट प्रताप सिंह टेपू ने कहा कि महाराणा प्रताप  का व्यक्तित्व जाति,सम्प्रदाय धर्म से परे है। हल्दीघाटी और अरावली की पहाड़ियां 500 साल बाद भी महाराणा प्रताप के शौर्य को जिंदा रखे हुवे है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप आज भी हर हृदय में जीवित है, उनका नाम प्रेरणा जगाने वाला है। उनका गाथा सुनकर कायर व्यक्ति भी रोमांचित होकर सूरवीर बन जाता है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के आदर्शों की आज के परिप्रेक्ष्य में सख्त जरूरत है, अभाव से लड़ना है,सर्व समाज को साथ रखना है , हाकिम खान से लेकर राणा पुंजा तक का साथ,सबका साथ सबका विकास, का नारा महामानव राणा प्रताप के सिद्धांतों से ही पूरा होगा।

फलोदी क्षेत्र के कांग्रेस नेता कुम्प सिंह पातावत ने कहा कि महाराणा प्रताप की प्रासंगिकता आज भी बरकार है, उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने अकबर का विरोध किया और बहुत ही सँघर्षमय जीवन गुजारा, जो युवा यंहा बैठे वो प्रण ले, महाराणा प्रताप की तरह कठिन जीवन जीना सीखे।

उन्होंने महाराणा प्रताप की तुलना रामायण काल से करते हुवे कहा कि जिस तरह भरत ने सिंहासन पर राम के खड़ाऊ रखकर शासन चलाया उसी तरह महाराणा प्रताप ने एकलिंगजी को राजा मानकर सेवक बनकर शासन किया।

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महाराणा प्रताप का जीवन भगवान राम से प्रेरित रहा, सिद्धान्तों और मूल्यों को ना राम ने त्यागा ना महाराणा परताप ने त्यागा।

इसलिए उनकी जयंती मनाई जा रही है। युवा प्रतिज्ञा करे और अपने परिवार और समाज को सुदृढ़ करें। खुद के लिए जीने वाले राजाओ की जयंती नहीं मनाई जाती है बल्कि महाराणा प्रताप जैसे भारत माता के वीर सपूतों की जयंती मनाई जाती है।

इस अवसर पर राजेन्द्र सिंह भियाड़ ने कहा हजारो साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है तब जाके महाराणा परताप जैसे लोग होते है। राजे महाराजे बहुत हुवे पर क्या कारण है लोग महाराणा प्रताप की ही जयंती मना रहे है।

उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप सभी जाति के लोगो के नायक है। महाराणा प्रताप पर सिर्फ राजपूत अपना ठप्पा ना लगाए,सैकड़ो साल बाद महाराणा प्रताप जैसे शानदार व्यक्ति पैदा होते है।

महाराणा प्रताप भील,मीना जैसे आदिवासियों के बीच बड़े हुवे। उन्हें जनता ने महाराणा बनाया। महाराणा प्रताप के सगे ग्यारह भाइयो में से 10 अकबर की सेना में चले गए। फिर भी महाराणा ने हिम्मत नही हारी। हिंदुस्तान के बादशाह के सामने लडते रहे।

उनकी परिस्थितियों से लड़ने की ताकत के कारण आज जयंती मनाई जाती है, उनके व्यक्तित्व के कारण ही भामाशाह ने खजाना खोला, राणा पुंजा भील , हाकिम खान सूर भी उनके साथ अकबर के सेनापति सवाई मानसिंह से लड़े।36 कौम के साथ साथ अफगान के पठान भी महाराणा की सेना में लड़े।

उन्होंने कहा कि नौजवानों के लिये महाराणा प्रताप के आदर्श रोज जीवन मे अपनाने की जरूरत। उन्होंने कुम्प सिंह से निवेदन किया आपकी कांग्रेस सरकार से कहे कि स्कूली किताबो में महाराणा प्रताप के प्रसंग से छेड़छाड़ ना हो। क्योंकि अकबर कभी महाराणा को हरा नहीं पाया।

बालेटा धाम के गादीपति निरंजन भारती ने कहा कि जो बातों सुनी ग्रहण कर हिरदे उतार,गाँठड़ी बांध भेली ले जाओ। 36 कौम एक रहो।

नाचना ठाकुर विक्रम सिंह ने कहा कि सभी लोग महाराणा प्रताप के आदर्श अपनाए। 36 कौम के भेदभाव मिटाए। क्षत्रिय का धर्म समरसता बनाये रखना है।